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Baniya Bahu

Baniya Bahu

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  • Pages: 130p
  • Year: 2009
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 13: 9788171196074
  •  
    बनिया-बहू बनिया-बहू की कथा 16वीं शताब्दी के एक आख्यान पर आधारित है, जिसे तत्कालीन कवि मुकुंदराम चक्रवर्ती ने अपनी कृति ‘चंडीमंगल’ में लिपिबद्ध किया था। महाश्वेता देवी ने यह आख्यान इसी पुस्तक से उठाया है और उसे एक अत्यंत मार्मिक उपन्यास में ढाला है। महाश्वेताजी का मानना है: ‘‘बनिया-बहू संभवतः आज भी प्रासंगिक है। कानून को धता बता कर आज भी बहुविवाह प्रचलित है।...और ‘बेटे की माँ’ न हो सकने की स्थिति में आज भी स्त्रियाँ खुद को अपराधी मानती हैं...अर्थात् अभी भी हम बीसवीं शताब्दी तथा अन्य बीती शताब्दियों में एकसाथ रह रहे हैं।’’ (इसी पुस्तक की भूमिका से) बनिया-बहू बहुविवाह प्रथा की इसी चिराचरित त्रासदी की कहानी है। एक स्त्री के बाँझपन के हाहाकार के साथ उसके द्वारा एक दूसरी अत्यंत कोमल, कमनीय तथा सरल बालिका पर किए गए अकथ अत्याचार से नष्ट होते पारिवारिक जीवन और सुख-शांति का मर्मस्पर्शी आख्यान है यह उपन्यास। अंततः दोनों ही स्त्रियाँ सामाजिक कुरीतियों, अंधविश्वासों के मकड़जाल में फँस कर दम तोड़ देती हैं, जबकि उनका कोई दोष नहीं। लेखिका ने दोनों स्त्रियों के साथ पूरी सहानुभूति के साथ, तन्मय होकर, उन स्थितियों का विश्लेषण तथा उद्घाटन किया है, जिनमें एक भयानक सामाजिक विनाश के बीज निहित हैं। एक सिद्धहस्त कथा लेखिका की कलम से निकली एक अनुपम औपन्यासिक कृति।

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    Mahashweta Devi

     महाश्वेता देवी

    जन्म : 1926, ढाका।

    पिता श्री मनीष घटक सुप्रसिद्ध लेखक थे।

    शिक्षा : प्रारम्भिक पढ़ाई शान्तिनिकेतन में, फिर कलकत्ता विश्वविद्यालय से अंग्रेजी साहित्य में एम.ए.।

    अर्से तक अंग्रेजी का अध्यापन।

    कृतियाँ अनेक भाषाओं में अनूदित।

    हिन्दी में अनूदित कृतियाँ : चोट्टि मुण्डा और उसका तीर, जंगल के दावेदार, अग्निगर्भ, अक्लांत कौरव, 1084वें की माँ, श्री श्रीगणेश महिमा, टेरोडैक्टिल, दौलति, ग्राम बांग्ला, शालगिरह की पुकार पर, भूख, झाँसी की रानी, आंधारमानिक, उन्तीसवीं धारा का आरोपी, मातृछवि, सच-झूठ, अमृत संचय, जली थी अग्निशिखा, भटकाव, नीलछवि, कवि वन्द्यघटी गाईं का जीवन और मृत्यु, बनिया-बहू, नटी (उपन्यास); पचास कहानियाँ, कृष्णद्वादशी, घहराती घटाएँ, ईंट के ऊपर ईंट, मूर्ति, (कहानी-संग्रह); भारत में बँधुआ मजदूर (विमर्श)।

    सम्मान : जंगल के दावेदारपुस्तक पर साहित्य अकादेमी पुरस्कारमैगसेसे अवार्डतथा ज्ञानपीठ  पुरस्कारद्वारा सम्मानित।

    निधन : 28-07-2016 (कोलकाता)।

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