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Sidha Sada Rasta

Sidha Sada Rasta

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  • Pages: 387p
  • Year: 2007
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 13: 9788171198115
  •  
    सीधा-सादा रास्ता भगवतीचरण वर्मा के चर्चित उपन्यास ‘टेढ़े-मेढ़े रास्ते’ की उत्तर-कथा है। इस उपन्यास के पात्र, परिस्थितियाँ, सामाजिक व्यवहार, घर, सम्पत्ति और भूगोल सब वही हैं जो ‘टेढ़े-मेढ़े रास्ते’ के हैं लेकिन ‘टेढ़े-मेढ़े रास्ते’ की कहानी सीधा-सादा रास्ता के पात्रों का मात्र अतीत है। इस तरह सीधा-सादा रास्ता ‘टेढ़े-मेढ़े रास्ते’ के आगे की कहानी है। रांगेय राघव को भगवतीचरण वर्मा के उपन्यास में वर्णित पात्रों, परिस्थितियों और विचारों में कुछ विकृतियाँ नजर आईं इसलिए उन्होंने उन्हीं पात्रों और परिस्थितियों के आधार पर इस उपन्यास की रचना की। हिन्दी साहित्य के दो दिग्गजों के वैचारिक संघर्ष का प्रतिफलन यह उपन्यास पढ़ना अपने आपमें एक दिलचस्प अनुभव से गुजरने जैसा है। प्रस्तुत उपन्यास के लेखक रांगेय राघव के ही शब्दों में, ‘‘जैसा जो वर्मा जी का पात्र है, उसको मैंने वैसा ही लिया है, पर वर्मा जी ने चित्र का एक पहलू दिखाया है, मैंने दूसरा भी।’’ यह उपन्यास इस तथ्य की पुष्टि करता है कि ‘देश और काल के बिना कुछ भी सीधा...सादा...रास्ता नहीं है।’ अपनी रौ में बहा ले जानेवाली भाषा, अनूठे शिल्प और जबर्दस्त अन्तर्वस्तु के कारण यह उपन्यास पाठकों के रचनात्मक सोच को नया आयाम प्रदान करेगी, ऐसी आशा है।

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    Rangeya Raghav

    जन्म: 17 जनवरी, 1923, आगरा।

    मूल नाम: टी.एन.वी. आचार्य (तिरुमल्लै नंबकम् वीरराघव आचार्य)।

    शिक्षा: आगरा में। सेंट जॉन्स कॉलेज से 1944 में स्नातकोत्तर और 1949 में आगरा विश्वविद्यालय से गुरु गोरखनाथ पर पी-एच.डी.। हिंदी, अंग्रेजी, ब्रज और संस्कृत पर असाधारण अधिकार।

    कृतियाँ: 13 वर्ष की आयु में लिखना शुरू किया। 1942 में अकालग्रस्त बंगाल की यात्रा के बाद एक रिपोर्ताज लिखा - तूफानों के बीच। यह रिपोर्ताज हिन्दी में चर्चा का विषय बना।

    मात्र 30 वर्ष की आयु में कविता, कहानी, उपन्यास, नाटक, रिपोर्ताज के अतिरिक्त आलोचना, संस्कृति और सभ्यता पर कुल मिलाकर 150 से अधिक पुस्तकें लिखीं।

    साहित्य के अतिरिक्त चित्रकला, संगीत और पुरातत्त्व में विशेष रुचि। अनेक रचनाओं का हिंदीतर भारतीय और विदेशी भाषाओं में अनुवाद।

    सम्मान: हिंदुस्तानी अकादमी पुस्कार (1947), डालमिया पुरस्कार (1954), उत्तरप्रदेश शासन पुरस्कार (1957 तथा 1959) और मरणोपरांत महात्मा गांधी पुरस्कार (1966) से सम्मानित।

    निधन: लंबी बीमारी के बाद 12 सितंबर, 1962 को बंबई में।

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