आषाढ़ का आखिरी दिन कथाकार सुनील विक्रम सिंह का दूसरा कहानी संग्रह है। इस किताब का शीर्षक दिलचस्प है। मोहन राकेश का नाटक है: आषाढ़ का एक दिन और यह है आषाढ़ का आखिरी दिन ।
इस संग्रह की कहानियाँ प्रेम की सघन अनुभूति की कहानियाँ हैं। इन कहानियों में प्रकृति के रमणीय रूप मिलते हैं। आज जब बहुत-सी कहानियों में कथानक के नाम पर स्पष्टवादिता दिखलाई देती हैं, वहाँ सुनील विक्रम सिंह की कहानियाँ कल्पना का मनोरम संसार रचती हैं। इस संग्रह की कहानियों में पठनीयता है। कहानियों के संवाद मर्मस्पर्शी हैं।

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