मैंने पाँच उपन्यासों के द्वारा भारतवर्ष के इतिहास का परिक्रमण शुरू किया था। 1757 ई. में जिस दिन अंग्रेज़ों ने पहले-पहल भारतवर्ष में पाँव रखा था, उसी दिन शुरू हुआ यह परिक्रमण। ‘बेगम मेरी विश्वास’ इस परिक्रमण का सूत्रपात है। उसके पश्चात् ‘साहब बीबी गुलाम’, ‘खरीदी कौड़ियों के मोल’, ‘इकाई दहाई सैकड़ा' के साथ बीसवीं सदी के छठे दशक में जब भारत की पूर्वी सीमा चीनी आक्रमण से आक्रान्त थी, यह परिक्रमण सम्पूर्ण हुआ। उसके बाद स्वाधीनोत्तर युग के अति आधुनिक विक्षुब्ध बंगाल की राजधानी का चित्र हैं—‘चलो कलकत्ता’। बांग्ला में पहली बार जब यह पुस्तक प्रकाशित हुई, यहाँ कांग्रेस सरकार सत्तारूढ़ थी।
पाठक अगर इन पुस्तकों को कालानुक्रमिक भाव से पढ़ें, तो अर्थ के रस-ग्रहण में उन्हें विशेष सुविधा होगी।
—बिमल मित्र

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