जॉन बर्जर की इस किताब ने पेंटिंग और कला-आलोचना के बारे में सोचने का तरीक़ा बदल दिया। यह शब्दों और चित्रों के ज़रिए दिखाती है कि हम जो कुछ भी देखते हैं, वह हमेशा सुन्दरता, सत्य, सभ्यता, रूप, स्वाद, वर्ग और लिंग सम्बन्धी हमारे अनेक पूर्वग्रहों से प्रभावित होता है। जॉन बर्जर ऑयल पेंटिंग्स, फ़ोटोग्राफ़्स और ग्राफ़िक कला में छिपे अर्थों की तहदारी की पड़ताल करते हैं और यह तर्क देते हैं कि जब हम देखते हैं, तो हम केवल देख नहीं रहे होते— हम छवियों की भाषा को पढ़ रहे होते हैं।
हमारे समय के सबसे प्रभावशाली बुद्धिजीवियों में से एक —ऑब्ज़र्वर
कला जगत के मुँह पर एक तमाचा... इस किताब ने ललित कला को पढ़ने और समझने के तरीके में क्रांति ला दी —गार्जियन
बर्जर विचारों को उसी तरह सँभालते हैं जैसे एक कलाकार रंगों को सँभालता है’ —जेनेट विंटरसन
हम अपने चारों ओर की दुनिया को कैसे देखते हैं? यह उन कुछ निर्णायक कृतियों में से एक है, जिनके रचनात्मक विचारों ने कला, डिज़ाइन और मीडिया पर लेखन के ज़रिए हमारी दृष्टि को हमेशा के लिए बदल दिया।

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