भारतीय समाजवाद के आकाश में डॉ. राममनोहर लोहिया का उदय एक ऐतिहासिक घटना थी। उनका सम्पूर्ण जीवन सदियों से उपेक्षित रहे लोगों के प्रति समर्पित था—फिर चाहे वह किसी भी धर्म, जाति या वर्ग का हो। यही कारण है कि समाजवाद के पुरोधा के रूप में उनका नाम हमेशा अग्रणी रहा है।
समाजवादी चिन्तक प्रो. रामगोपाल यादव द्वारा प्रणीत यह पुस्तक डॉ. लोहिया के अक्षय व्यक्तित्व एवं कृतित्व का बहुआयामी मूल्यांकन प्रस्तुत करती है। डॉ. लोहिया की वैश्विक दृष्टि की व्यापकता का संज्ञान कराती एवं सामाजिक-राजनीतिक क्षेत्र में परिवर्तन के अग्रदूत के रूप में उन्हें प्रतिष्ठित करती हुई यह कृति एक नया चिन्तन प्रस्तुत करती है। डॉ. लोहिया का जीवन-संघर्ष निरन्तर सामाजिक या उत्थानवादी चेतना के द्वन्द्व को रूपायित करता है। आर्थिक ग़ैर-बराबरी दूर करने और समतामूलक समाज बनाने में उनका चिन्तन मार्क्सवादियों से भिन्न था।
भारतीय समाजवाद के प्रवर्तक डॉ. लोहिया की 105वीं जयन्ती के उपलक्ष्य में प्रो. यादव द्वारा रचित इस किताब की उपादेयता समाजवाद के विकास की दिशा में एक अमूल्य योगदान है। पुस्तक की उपादेयता इस अर्थ में भी बढ़ जाती है कि यह लोहिया जी के व्यक्तित्व और उनकी निज परिमार्जित की हुई विचारधारा और उनके योगदान सब पर समुचित प्रकाश डालती है।

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