स्मृतिलोप से स्मृतियुक्त समय में
वापसी का आख्यान या कुछ
पुराने और बहुत कुछ नए बनते
अनुभव-संसार में जीने की डायरी।
वर्तनी और व्याकरण के फ़्रेम से
बाहर, जीवन की चालढाल में
बनती हुई भाषा में लिखी गई यह
किताब–‘मैं कोई और’–जीवन
संघर्ष का गद्य है।
अविश्वसनीय, किन्तु विश्वसनीय।
रचनात्मक और प्रेरक।

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