ये कविताएँ अलग-अलग समय पर लिखी गई हैं, अलग-अलग परिस्थिति और भाव है इनमें, ऐसा लगा कि ये भाव प्रकट होने चाहिए। हर प्रकार के भाव में दुनिया के प्रति एक अलग आयाम होता है, तो हर आयाम आता-जाता रहे, प्रकट होता रहे तो बहुत सुन्दर हो जाता है। इसी के साथ कुछ आयाम जीवन में मन के विषाद को खाली करने के भी साधन होते हैं। अनेकों बार ऐसा होता है कि हम बहुत कुछ देखते हैं जो आगे-पीछे चल रहा होता है, सामने घट रहा होता है। मन कचोटता भी है पर कुछ देश, काल, परिस्थितियों के कारण मन को समझाना पड़ता है, चुप बैठना पड़ता है।
पर कलम को कहाँ चैन? यह तो मन से बातें करती मन को लिखती है मन के अनुसार। मन की आपबीती, कलम से ज्यादा मन को कौन देख-समझ पाया है, विशेषकर ऐसे हृदय जो डूबकर दृश्य देखते हैं और दृश्य में बसते नहीं बस कलम के सहारे उतार देते हैं अनुभव।
आज अपनी कलम से अपने मन की बातचीत को यहाँ प्रस्तुत किया है, इस आशा के साथ कि यह आयाम भी देखा-समझा और पसन्द किया जाएगा।

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