शरद पगारे को उनकी इतिहास-आधारित कथा-रचनाओं के लिए विशेष रूप से जाना जाता है। ऐतिहासिक घटनाओं और व्यक्तित्वों की रचनात्मक शैली में पुनर्सृजना असाधारण कल्पना और तथ्यात्मक तथा तार्किक संगति की माँग करती है। शरद पगारे ने अपने ‘गुलारा बेगम’ जैसे चर्चित उपन्यासों में इस कौशल का परिचय दिया है। बीच-बीच में उन्होंने इतिहास को आधार बनाकर कहानियाँ भी लिखीं जो कई संग्रहों में आ चुकी हैं।
‘सांध्य तारा’ में ऐसी ऐतिहासिक कथाओं को संकलित किया गया है जिनके केन्द्र में स्त्रियाँ हैं। वैशाली की नगरवधू आम्रपाली, वैदिक युग की ययाति पुत्री राजकुमारी माधवी, ईसा पूर्व छठी सदी की राजनर्तकी शालवती, मध्ययुग की रजिया सुल्ताना, रानी रूपवती आदि इतिहास की ऐसी नायिकाएँ हैं जिनकी तरफ़ अकसर रचनाकारों की निगाह लौटती रही है।
शरद पगारे ने उन्हें अपनी सिद्ध लेखनी से इन कहानियों में ऐसे साकार किया है कि पढ़ते हुए हम कुछ समय के लिए उन्हीं के समय में लौट जाते हैं।

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