अम्बरीन हसीब अम्बर
अम्बरीन हसीब अम्बर का तअल्लुक़ कराची, पाकिस्तान से है। वह 1981 में पैदा हुईं। अदब और शायरी उन्हें विरासत में मिली, उनके वालिद प्रोफ़ेसर सहर अंसारी उर्दू के एक अहम शायर और अदीब हैं। अम्बरीन हसीब अम्बर के अभी तक दो शेरी मजमूए ‘दिल के उफ़ुक़ पर’ (2012) और ‘तुम भी ना’ (2020) प्रकाशित हो चुके हैं। उनकी शायरी उर्दू दुनिया में एक औरत की मोहब्बत, बग़ावत और अहमियत को अलफ़ाज़ देती हुई मालूम होती है। यही वजह है कि कम वक़्त में ही उन्होंने मुशायरों में अपने इस अनोखे उस्लूब और बेबाक अन्दाज़ से एक ख़ास जगह बनाई है। अम्बरीन एक बा-कमाल, हुनरमन्द और सच्चे जज़्बों की तर्जुमानी में माहिर शायर हैं, जिन्होंने उर्दू ग़ज़ल में तवाना उर्दू शायरी की रिवायत में एक और मुनफ़रिद लहजे का इज़ाफ़ा किया है। ‘याद का चेहरा’ उनके पहले शेरी मजमूए ‘दिल के उफ़ुक़ पर’ का देवनागरी लिप्यंतरण है।

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