आरती पण्ड्या
जन्म : 1 जुलाई, 1949 (आगरा)।
शिक्षा : लखनऊ विश्वविद्यालय से संस्कृत में एम.ए.।
अनुभव : साहित्य मनीषी श्री अमृतलाल नागर की सुपुत्री होने के नाते साहित्यिक माहौल में आँखें खोलीं। पुस्तकों से दोस्ती बचपन से रही। रंगमंच, रेडियो और टी.वी. से भी जुड़ाव। साथ ही छुट-पुट लेखन चलता रहा। लेकिन उपन्यास लिखने का यह पहला प्रयास। इसीलिए कोई गहन-गम्भीर विषय उठाने के बजाय हल्का विषय हाथ में लेना ही उचित समझा।
विवाह एक फ़ौजी से हुआ, इसलिए जीवन में सीखने को बहुत कुछ मिला। देश के अलग-अलग प्रदेशों में रहने और वहाँ के लोगों से मिलने के अनुभव तो हुए ही, साथ ही वायु सेना के लोगों के बीच रहकर एक सच्ची भारतीय होने का अहसास भी मन में घर कर गया। समस्त भारत दर्शन के बाद अब अपने पतिदेव के साथ एक अवकाश प्राप्त जीवन का आनन्द ले रही हैं।

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