बी. पुट्टस्वामय्या
जन्म : 24 मई, 1897
बी. पुट्टस्वामय्या कन्नड़ के विख्यात नाटककार, पत्रकार, उपन्यासकार, शोधकर्ता, इतिहासवेत्ता, संगीत एवं कला के उपासक थे। उनके द्वारा रचित ‘कुरुक्षेत्र’ और ‘दशावतार’ नाटकों के व्यवसायी नाटक मंडलियों द्वारा लगभग ढाई दशक तक लगातार मंचन होते रहे। उन्होंने बीस से भी अधिक नाटक लिखे। कुछ कारणों से उनका मन नाटकों से उचट गया और उपन्यास लेखन की ओर मुड़ गए। इतिहास की समस्याओं को सुलझाने में जिज्ञासा होने के कारण ऐतिहासिक उपन्यासों की रचना में लगे रहे।
कर्नाटक में 12वीं सदी में एक बहुआयामी आन्दोलन छिड़ा था। बसवेश्वर उस आन्दोलन के कर्णधार थे। उसी आन्दोलन को विषयवस्तु बनाकर पुट्टस्वामय्या ने सिलसिलेवार छह उपन्यासों की रचना की—
‘उदय-रवि’, ‘राज्यपाल’, ‘कल्याणेश्वर’, ‘नागबन्ध’, ‘अधूरा सपना’ और ‘क्रान्ति-कल्याण’। ‘क्रान्ति-कल्याण’ को 1965 में ‘साहित्य अकादेमी पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया।
निधन : 25 जनवरी, 1984

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