दया पवार
शीर्षस्थ दलित लेखक, कवि और समीक्षक।
1935 में जन्म।
पश्चिम रेलवे के लेखा विभाग से दीर्घ सेवा के बाद निवृत्ति।
1974 में प्रकाशित प्रथम कविता-संग्रह ‘कोंडवाड़ा’ (काँजी हाउस) को ‘महाराष्ट्र शासन पुरस्कार’। उसके बाद आत्मकथ्य ‘बलुतं’ (अछूत—1979) को कई राष्ट्रीय और अन्तरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हुए और कई भाषाओं में उसके अनुवाद हुए।
1983 में प्रकाशित कहानी-संग्रह ‘विटाल’ (अपवित्र) और ‘चावड़ी’ (पंचायत) से दलित सृजनात्मक संवेदनशीलता के नए आयाम नज़र आए। उन्होंने भगवान बुद्ध के ‘धम्मपद’ से कुछ गाथाओं का सीधा पाली से मराठी में अनुवाद किया जो 1991 में प्रकाशित हुआ।
श्रीलंका, फ्रांस, जर्मनी तथा अन्य कई विदेश यात्राएँ।
1996 में दिल्ली में आकस्मिक देहान्त।

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