कमलेश
हिन्दी के सुप्रसिद्ध कवि, विचारक, अनुवादक और राजनीतिकर्त्ता। अब दिवंगत। इनके तीन कविता-संग्रह ‘जरत्कारु’, ‘खुले में आवास’ और ‘बसाव’ प्रकाशित हुए हैं। कमलेश जी की कविताओं में भारतीय परम्परा की समृद्धि के दर्शन को अनेक आलोचकों ने रेखांकित किया है। इन्होंने पाब्लो नेरुदा की प्रसिद्ध कविता ‘माचू पिच्चू के शिखर’ समेत अनेक कविताओं के अनुवाद किए हैं। कमलेश जी ने साहित्य और इतिहास आदि अनेक अनुशासनों की पुस्तकों पर विस्तार से लिखा है। अपने निधन से पहले कमलेश जी भारत की जाति-व्यवस्था आदि अनेक संस्थानों को औपनिवेशिक विचारों के कुहासे से बाहर निकालकर सम्यक् आलोक में देखने का महती प्रयत्न कर रहे थे।

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