मिर्ज़ा मुहम्मद हादी ‘ रुस्वा ’
मिर्ज़ा मुहम्मद हादी ‘रुस्वा’ का जन्म 1858 में लखनऊ में हुआ। उनके पूर्वज मुग़ल काल में भारत आए थे और अवध में बस गए थे। प्रारम्भिक शिक्षा उनके पिता ने दी, जिनसे उन्होंने विशेष रूप से गणित का ज्ञान हासिल किया। फ़ारसी, अरबी, दर्शन, तर्कशास्त्र, रसायनशास्त्र, संगीत और खगोल विज्ञान पर उनकी गहरी पकड़ थी। रुस्वा ने कुछ समय पत्रकारिता और अन्य नौकरियाँ कीं, परन्तु अन्ततः अध्यापन से जुड़ गए। उन्होंने लखनऊ और बाद में हैदराबाद में कार्य किया तथा दारुलतरजुमा से सम्बद्ध होकर अनेक अनुवाद किये। उनकी साहित्यिक पहचान मुख्यतः उनके उपन्यासों से है। ‘इफ़शा-ए-राज़’ (1896), ‘उमराव जान अदा’ (1899), ‘ज़ाते शरीफ़’ (1900), ‘शरीफ़ज़ादा’ (1900) और ‘अख़्तरी बेगम’ (1924) उनकी प्रमुख कृतियाँ हैं। इनमें ‘उमराव जान अदा’ उनकी सर्वाधिक प्रसिद्ध रचना है।

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