नामदेव सुपरिचित आलोचक, कवि और कथाकार हैं। 2019 और 2020 में वे दलित साहित्य महोत्सव के संयोजक रहे हैं। उनकी प्रमुख पुस्तकें हैं—‘भारतीय मुसलमान : हिन्दी उपन्यासों के आईने में’, ‘दलित चेतना और स्त्री विमर्श’, ‘जोतिबा फुले : सामाजिक क्रान्ति के अग्रदूत’, ‘आलोचना की तीसरी परम्परा और जयप्रकाश कर्दम’, ‘स्त्री स्वर : अतीत और वर्तमान’, ‘छप्पर की दुनिया : मूल्यांकन और अवदान’, ‘साझेदारी के पक्ष में हिन्दी कथा साहित्य’ (आलोचना); ‘न समझे जाने का दर्द’ (कविता-संग्रह)। सम्प्रति दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोड़ीमल कॉलेज के हिन्दी विभाग में आचार्य हैं।
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