नन्दिनी सुन्दर
नन्दिनी सुन्दर दिल्ली विश्वविद्यालय में समाजशास्त्र की प्रोफ़ेसर हैं और पिछले 30 सालों से बस्तर का दौरा करती रही हैं। उनकी पहली पुस्तक ‘गुंडा धूर की तलाश में (1854-1996)’ बस्तर के औपनिवेशिक और उत्तर-औपनिवेशिक अतीत का एक आधिकारिक लेखा-जोखा है।

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