राजवन्ती मान
राजवन्ती मान का जन्म रोहतक, हरियाणा में हुआ। उन्होंने महर्षि दयानन्द विश्वविद्यालय, रोहतक से इतिहास में एम.ए. व पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ से उर्दू में एम.ए. और पी-एच.डी. की उपाधि प्राप्त की। अंग्रेज़ी, हिन्दी और उर्दू भाषा में लेखन। भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद की सीनियर अकादमिक फेलो, भारतीय इतिहास अभिलेख समिति की नामित सदस्य। राज्य अभिलेखागार, हरियाणा सरकार, पंचकूला में उपनिदेशक पद पर कार्यरत रहीं।
उनकी प्रमुख पुस्तकें हैं—‘हदें टूटना जरूरी है’, ‘परिन्दे की आरजू’, ‘रात-दिन जगाएँ आकाशगंगाएँ’ (कविता-संग्रह); ‘चन्द्रशेखर आज़ाद : विवेकशील क्रान्तिकारी’, ‘भगत सिंह को फाँसी : चुनिन्दा गवाहियाँ’ ‘हैंगिंग ऑफ़ भगत सिंह : कम्प्लीट ट्रिब्यूनल प्रोसिडिंग्स’, ‘हैंगिंग ऑफ़ भगत सिंह : सिलेक्ट ट्रिब्यूनल प्रोसिडिंग्स’ (सह-लेखक), ‘हरफूल जाट जुलाणीवाला : हरियाणा की लोक-संस्कृति समाज-साहित्य के आलोक में’ (इतिहास); ‘थेम्स तरल इतिहास है!’ (यात्रा-वृत्तान्त); ‘सरदार भगतसिंह : ए बैन्ड बायोग्राफी’, ‘सरदार भगतसिंह : प्रतिबन्धित जीवनवृत्त’, ‘रक्त ध्वज : प्रतिबन्धित नाटक और अन्य साहित्य 1930-32’, ‘कलम की आँच’, ‘अमर क्रान्तिकारी : प्रतिबन्धित जीवनवृत्त और अन्य साहित्य 1930-39’ (जब्तशुदा क्रान्तिकारी साहित्य)।
उन्हें ‘चन्द्रशेखर आज़ाद : विवेकशील क्रान्तिकारी’ के लिए हरियाणा साहित्य अकादमी के ‘श्रेष्ठ कृति पुरस्कार’; हरियाणा उर्दू अकादमी के ‘तर्जुमानगार अवार्ड’ और ‘खिदमते अदब अवार्ड’; हिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग के ‘सम्मेलन सम्मान’ समेत कई सम्मानों से सम्मानित किया गया है।
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