विगत वर्षों में उच्चतर व्यष्टि आर्थिक सिद्धान्त में अनेक मौलिक परिवर्तन हुए हैं, जिनका राष्ट्रभाषा हिन्दी में स्नातकोत्तर की आर्थिक सिद्धान्त विषयक पुस्तकों में समावेश पूरी तरह से नहीं हुआ है, अत: आर्थिक साहित्य में इस अभाव की पूर्ति इस पुस्तक में की है।
इस पुस्तक में आर्थिक सिद्धान्तों की नवीनतम तथा आधुनिक प्रवृत्तियों तथा दृष्टिकोणों की विश्लेषणात्मक व्याख्या की गई है। इस बात का पूरा प्रयास किया गया है कि जहाँ एक ओर विषय वस्तु से जुड़े कठिन सिद्धान्तों व समीकरणों की व्याख्या सरल एवं बोधगम्य शैली में प्रस्तुत की जाये, वहीं दूसरी ओर इसकी परम्परागत संकल्पनाओं की आधुनिकतम विवेचना एवं समीक्षा भी पाठकों तक पहुंचायी जाये। विषय का प्रतिपादन अत्यन्त ही सरल, सुबोध तथा सुन्दर भाषा में किया गया है। जहाँ-तहाँ रेखाचित्रों तथा सारणियों के प्रचुर प्रयोग के माध्यम से कठिन प्रसंग को सरलतम रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है।
पुस्तक में उच्चतर गणित के बजाय सरल बीजगणित तथा अंकगणित की सहायता से आर्थिक सिद्धान्त के कठिन विषय को समझाने का प्रयास किया गया है।
इस पुस्तक में उन सभी प्रश्नों तथा समस्याओं पर प्रकाश डालने का प्रयास किया है जिनका ज्ञान स्नातकोत्तर स्तर के विद्यार्थियों के लिए आपेक्षित है।


