इस ग्रंथ की रचना उन विद्यार्थियों को ध्यान में रखकर की गई है जो भाषाविज्ञान की आधारभूत धारणाओं एवं संकल्पनाओं को गहराई से समझना चाहते हैं तथा विषय की पारिभाषिक शब्दावली का समुचित ज्ञान प्राप्त करना चाहते हैं। भांषाविज्ञान में आज अनेक संप्रदाय है जिनमें आंतरिक मतभेद विद्यमान् हैं। भाषाविज्ञान के विद्यार्थियों के अतिरिक्त हिन्दी एवं अन्य भारतीय भाषाओं के साहित्य के उन विद्यार्थियों के लिए भी यह ग्रन्थ उपयोगी सिद्ध होगा जिनके स्नातक और स्नातकोत्तर में तथा एम. फिल् के पाठ्यक्रमों में भाषा एवं भाषाविज्ञान का प्रश्न-पत्र सम्मिलित है ।
यह ग्रंथ विद्यार्थियों को भाषा और भाषा विज्ञान एवं आधुनिक भारतीय आर्य भाषाओं की जानकारी, हिंदी भाषा की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का परिचय, हिंदी के भौगोलिक विस्तार का परिचय, देवनागरी लिपि का परिचय, भाषाविज्ञान एवं मनोविज्ञान, भाषाविज्ञान एवं मानवविज्ञान, भाषाविज्ञान एवं समाजविज्ञान तथा शैलीविज्ञान, भाषाविज्ञान की प्रमुख शाखाओं की जानकारी तथा अनुप्रयुक्त भाषाविज्ञान की शाखाओं की जानकारी देने में सक्षम सिद्ध होगी।
प्रोफेसर महावीर सरन जैन
हिन्दी के अन्तरराष्ट्रीय स्तर के विद्वान एवं प्रख्यात भाषावैज्ञानिक प्रोफेसर जैन ने भारत सरकार के केन्द्रीय हिन्दी संस्थान के निदेशक, रोमानिया के बुकारेस्त विश्वविद्यालय के हिन्दी के विजिटिंग प्रोफेसर तथा हिन्दी के अध्ययन अध्यापन एवं अनुसन्धान तथा हिन्दी के प्रचार-प्रसार एवं विकास के क्षेत्रों में विश्व स्तर पर योगदान दिया है।


