‘चिट्ठियों में नामवर’ प्रतिष्ठित साहित्यकारों की ओर से नामवर सिंह को लिखे पत्रों और नामवर जी द्वारा अपने समकालीनों और परिवारजनों को लिखे पत्रों का विशिष्ट संचयन है। इसमें संकलित पत्र हिन्दी के शीर्ष व्यक्तित्व नामवर सिंह की लगभग आठ दशकों में फैली सक्रियता को रेखांकित करते हैं और साथ ही इस पूरे दौर में हिन्दी समाज में चली बहसों और विमर्शों का परिचय भी हमें देते हैं।
चार खंडों में समायोजित इस पुस्तक के पहले खंड में उनके मित्रों, छात्रों, नए लेखकों-कवियों और समाज के विभिन्न वर्गों से आते लोगों के पत्र हैं। उनके गुरु हजारीप्रसाद द्विवेदी के साथ-साथ पाठक यहाँ शिवदान सिंह चौहान, विजयदेव नारायण साही, राही मासूम रज़ा, अज्ञेय, धूमिल और विश्वनाथ प्रताप सिंह आदि के ऐतिहासिक महत्त्व के पत्र पढ़ पाएँगे।
दूसरे खंड में वे पत्र शामिल किए गए हैं जिनमें हम नामवर सिंह को उनके परिवार के भीतर देख पाते हैं। उनके पिता स्व. नागर सिंह, भाई काशीनाथ सिंह और पुत्र विजय प्रकाश सिंह और अन्य परिजनों द्वारा लिखे इन पत्रों का रंग ही अलग है।
तीसरे खंड में उनके बेटे विजय प्रकाश सिंह को लिखे उनके पत्र हैं। चौथे खंड में वे पत्र है जो नामवर जी ने अपने परिजनों और साहित्यकार मित्रों को लिखे।
ये पत्र हिन्दी साहित्य, समाज और साहित्यकारों की निजी और वैचारिक दुनिया को जानने का प्रामाणिक स्रोत हैं, जो न केवल सामान्य पाठकों, बल्कि साहित्य के अध्येताओं के लिए भी रुचिकर और उपयोगी साबित होंगे।

