दालम्बेर का सपना फ़्रांसीसी प्रबोधनकाल के प्रमुख दार्शनिकों में शुमार, देनी दिदेरो की बहुचर्चित कृति है। दिदेरो ने पारम्परिक नैतिकता, समाज और धर्म के सम्बन्ध में अपने मौलिक विचारों से हलचल मचा दी थी। वह प्रगतिशील-वैज्ञानिक विचारों के पक्षधर थे और मनुष्य को सभी तरह के अन्धविश्वासों और जड़ताओं से मुक्त देखना चाहते थे। यह अपने वक़्त से बहुत आगे की सोच थी। स्वाभाविक ही उनके विचारों को लेकर विवाद भी उठे। दालम्बेर का सपना उनके जीते-जी प्रकाशित नहीं हो सका था। इसमें उनका भौतिकवादी और नास्तिक दृष्टिकोण दृढ़ता से अभिव्यक्त हुआ है जिसकी अहमियत आज भी बरक़रार है।

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