जगहें खाली नहीं होतीं काव्य-संग्रह में भिन्न-भिन्न तरह की कविताएँ संगृहीत हैं। हर कविता एक अलग दृष्टि लेकर सामने आती है। ये कविताएँ जीवन के बुनियादी सरोकारों से जुड़ी होने के कारण प्रकृति के साथ-साथ देश, समाज और लोकतंत्र का मार्मिक साक्षात्कार कराती हैं और यथार्थ के प्रति भावुक ही नहीं वैचारिक दृष्टिकोण भी दर्शाती हैं। साथ ही उस मानववादी दृष्टि से परिचय कराती हैं जो आधुनिकता का परिचायक है।
आदमी के पक्ष में ख़राब इरादों के प्रति कवि बड़ी सहजता से अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करता है-
झुकाया गया आदमी को
उस जगह भी
जहाँ सिर उठाने भर की जगह थी।


