डॉ. रामविलास शर्मा को पंजा लड़ाने का शौक़ था, लेकिन वे इसमें बेईमानी करते थे जिसके चलते निराला का बलशाली हाथ भी उनका पंजा नहीं दबा पाता था, लेकिन त्रिलोचन ने उन्हें पहले ही चेतावनी दे दी कि बेईमानी की तो चमड़ी उधेड़ लूँगा!
निराला को फ़ोटो खिंचवाने का शौक़ था। एक बार रेडियो पर काव्यपाठ से पहले एक फ़ोटो सेशन होना था, लेकिन निराला को फ़ोटो खिंचवाने से पहले डंड-बैठक करना जरूरी लगा, ताकि चेहरे पर चमक रहे!
ऐसे ही अनेक क़िस्से आपको इस किताब में मिलेंगे। हमारे साहित्य के मूर्धन्य व्यक्तित्वों के गुरु-गम्भीर व्यक्तित्व का वह पक्ष, जिसके बारे में हम ज़्यादा क्या, बिलकुल भी नहीं जानते, उसके बारे में यह किताब हमें काफ़ी कुछ बताती है।
विश्वनाथ त्रिपाठी ने एक लम्बा समय उन दिग्गजों के साथ गुजारा है, उनका अपना अध्ययन भी विशाल रहा है साथ ही साहित्य-समाज में भी वे बहुत गहरे रचे-बसे रहे हैं, इस पुस्तक में उन्होंने अपनी स्मृति से अनेक ऐसे किस्से और कहानियाँ दर्ज की हैं, जो साहित्यकारों के साथ एक पूरे दौर के साहित्यिक और सामाजिक माहौल को हमारे सामने जीवन्त कर देती हैं।


