मलयालम नाट्य सहित्य की ही नहीं बल्कि भारतीय नाट्य साहित्य की ही एक अनुपम उपलब्धि है ‘करारनामा’, जो संगीत नाटक अकादमी, दिल्ली से पुरस्कृत प्रख्यात मलयालम नाटककार डॉ. वयला वासुदेवन पिल्लै की अन्तिम और विशिष्ट नाट्य कृति है। विश्व नाट्य और रंगमंच के हर स्पन्दन से अभिज्ञ एवं जागरूक नाटककार डॉ. वयला का यह नाटक कथ्य और शिल्प की दृष्टि से नितान्त नूतन, प्रासंगिक तथा यथार्थवादी है। आजकल के भूमण्डलीकरण के माहौल में प्रकृति, परिस्थिति और स्त्री से जुड़े करारनामों का पर्दाफाश इसमें मिलता है। वैश्वीकरण के तहत, आदर्शों की बलि देकर पूँजीवादी ताकतों की गुलामी को मोल लेनेवाली नयी पीढ़ी के लिए यह नाटक एक सशक्त चेतावनी है। नये और पुराने जीवनमूल्यों का संघर्ष आद्यन्त इस नाटक को जीवन्त बनाये रखता है। मलयालम से हिन्दी में अनूदित यह नाटक तुलनात्मक साहित्य के अध्येताओं के लिए भी उपादेय है।

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