शेक्सपियर की मैकबेथ एक कालजयी कृति है। इसका प्रथम मंचन १६०६ में लंदन के ग्लोब थियेटर में हुआ था। महत्वाकांक्षा, सत्ता और हिंसा पर प्रश्न करता मैकबेथ किसी तख्त-ओ-ता़ज के किस्से से बढ़कर शेक्सपियर की अन्य ‘क्लासिक्स’ के साथ अंग्रेजी साहित्य की बहुमूल्य कृति है। मैकबेथ को पढ़ने के लिए सत्रहवीं शताब्दी के इंग्लैण्ड का राजतन्त्र एवं सामाजिक व्यवस्था समझना महत्त्वपूर्ण है। किसी भी अनुवाद की प्रक्रिया से पूर्व पात्रों की मनोदशा का गहन अध्ययन उन्हें मंच पर जीवन्त करने की क्षमता रखता है। हिन्दी में यह कृति पुन: गढ़ते हुए भी, अनुवादक के मन में १६०६ के ग्लोब थियेटर में बैठे लंदन के पारखी दर्शकों की कल्पना अवश्य रही होगी, जिनके लिए शेक्सपियर ने यह खेल रचा था।
वर्तमान में इस अनुवाद का निर्देशन थियेटर जगत की स्थापित हस्ती के. माधवन ने किया।
आशा है हिन्दीभाषी पाठकों के लिए शेक्सपियर का यह अनुवाद मंच पर निरन्तर प्रकट होगा।

