‘दर्रा-दर्रा हिमालय’ जैसे यात्रावृत्त के सर्जक, हिमालय के अन्वेषक यात्री अजय सोडानी ‘मेगी मेडम’ पुस्तक में बतौर कहानीकार मानव-मन का अन्वेषण कर रहे हैं, साथ ही उस समाज का भी जिसमें हम अपनी तमाम खूबियों और खामियों के साथ रहते हैं।
अजय सोडानी पेशे से चिकित्सक हैं, जिसके चलते आम आदमी के सुख-दुख और दैनिक उहापोह से उनका सीधा वास्ता रहता है। अपने गहरे सामाजिक और मानवीय लगाव के साथ अपने पात्रों और उनके सामाजिक जीवन से उठते सवालों को वे अपनी कहानियों में कथाकार के साथ-साथ एक चिन्तक के नजरिये से भी देखते हैं। यही कारण है कि उनकी कहानियाँ केवल मनोरंजन नहीं करतीं, बल्कि कुछ सवाल भी हमारे सामने छोड़ जाती है।
इस कहानी-संग्रह में संकलित कहानियाँ जीवन के अलग-अलग अनुभव-क्षेत्रों से ऐसी कई सकारात्मक और नकारात्मक प्रवृत्तियों को कुशलतापूर्वक रेखांकित करती हैं जिनसे मौजूदा समय की हताशा और उम्मीद, दोनों की तरफ पाठक का ध्यान जाता है, और लेखकीय दृष्टि के सहारे वह अपनी पक्षधरता को सहज ही चुन पाता है।
उदाहरण के लिए ‘जंगली’ शीर्षक कहानी जहाँ हमारे आसपास लगातार सक्रिय ऐसे लोगों पर रोशनी डालती है जो दूसरों का इस्तेमाल करते हुए अपनी महत्त्वाकांक्षा की सीढ़ियाँ चढ़ते रहते हैं, वहीं ‘नमक का मोल’ कहानी एक साधारण व्यक्ति के बड़प्पन का पता देती है और बताती है कि ऐसे ही उदारमना अकिंचन जन के बूते अन्तत: मनुष्यता जीतती है और स्वार्थान्ध महत्त्वाकांक्षाएँ मुँह की खाती हैं।
नए दृश्यों, नयी परिस्थितियों और नए प्रश्नों के साथ अपने समय को समझतीं कहानियों का एक प्रश्नाकुल संग्रह!


