क़िस्सा तोताराम एक विलक्षण उपन्यास है।
राधावल्लभ त्रिपाठी ने संस्कृत साहित्य की कालजयी कृति ‘शुकसारिका’ की कथा-संरचना को आधार बनाकर अपने देशकाल यानी आजकल के लोगों की कहानी इस उपन्यास में कही है। उपन्यास का महत्वपूर्ण पात्र है तोताराम जो कहानियाँ सुनाता है, और उसकी संगिनी मैनाबाई जिसका सहयोग कहानी को आगे बढ़ने में मददगार बनता है। ये कहानियाँ जिसको सुनाई जाती हैं वह है शम्पा, जो इस उपन्यास की नायिका है। कहानियाँ कहने-सुनने का क्रम अपने हरेक उतार-चढ़ाव में पुरातन और नवीन, परम्परा और आधुनिकता, पौरस्त्य और पाश्चात्य—इनके बीच संवाद रचता चलता है। इसमें कल्पना और यथार्थ एक-दूसरे में इस तरह घुल-मिल गये हैं कि उपन्यास के पात्रों का संसार कल्पित अथवा पराया नहीं लगता।
वास्तव में, यह उपन्यास अपनी संरचना में परम्परा का अनुसरण करता है लेकिन अपने सन्दर्भों में आधुनिक जीवन की अनेकानेक छवियाँ समेटता है। ऐसा अन्यत्र देख पाना दुर्लभ है।
एक अत्यन्त पठनीय कृति!


