भारत-पाकिस्तान विभाजन के मूलभूत कारणों में एक कारण भारतीय समाज के दो प्रभावशाली समुदायों में मतभेद है जिसे औपनिवेशिक ताकतों ने खूब बढ़ावा दिया। विभाजन की घटना ने स्वतंत्रता के साथ 1947 में आकार लिया किन्तु इसकी शुरुआत हिंसक गतिविधियों के साथ थोड़ा पहले हो गई थी। विभाजन पूर्व पंजाब के एक शहर रावलपिंडी के आसपास के गाँवों में भी भयानक दंगे हुए जिनमें पंजाब में रहने वाले हिन्दू, सिख और मुस्लिम सभी समुदायों को तरह-तरह का नुकसान उठाना पड़ा।
भीष्म साहनी का उपन्यास ‘तमस’ रावलपिंडी के दंगों का जीवन्त चित्र है जो भारत-पाकिस्तान विभाजन की पूर्व पीठिका बनकर आता है। यह उपन्यास तीनों समुदायों के भीतरी संसार, औपनिवेशिक शासकों के कुटिल चरित्र, पूँजीपतियों के आचरण और स्वतंत्रता आन्दोलन का नेतृत्व कर रही कांग्रेस के हालचाल को बारीकी से दिखाता है। इस उपन्यास पर फिल्म बनी और अनेक आलोचकों ने अपने अध्ययन के लिए इसका चुनाव किया।
राधाकृष्ण मूल्यांकन माला की गौरवशाली परम्परा में ‘तमस’ पर यह आलोचना कृति हिन्दी के आधिकारिक विद्वानों और नई पीढ़ी के लेखकों के चिन्तन-मनन का सार्थक परिणाम है। हिन्दी साहित्य के विद्यार्थियों-शोधार्थियों के लिए इस मूल्यांकन माला के पुनर्नवा प्रारूप में अब कृतिकारों के साथ कृतियों पर भी मूल्यांकनपरक पुस्तकें उपलब्ध हैं।
भीष्म साहनी की अविस्मरणीय कृति को विभिन्न दृष्टियों से देखने-समझने का यह प्रयास हिन्दी आलोचना के लिए भी विश्वसनीय होगा।

