हिन्दी लेखक श्री केशवचन्द्र वर्मा व्यंग्य लेखक के रूप में देश में सबसे पहले अपनी अलग पहचान बनाने वाले व्यक्तियों में हैं। वे हास्य व्यंग्य के श्रेष्ठ नाटककारों में तो गिने ही जाते हैं और उनके लिखे नाटक सारे देश में यत्र-तत्र खेले जाते रहे हैं। वे उन विरल लेखकों में रहे हैं जिन्होंने लेखन के अलावा रंगकर्म से सीधे जुड़ने का भी दायित्व-निर्वाह किया है। यह पुस्तक उसी की साक्ष्य है। वे आकाशवाणी से भी पैंतीस सालों तक सक्रिय रूप से जुड़े रहे और कार्यक्रमों का संचालन करते रहे। रंगकर्म के क्षेत्र में उनके अनुभव तो अनूठे हैं ही, वे उस हिन्दी रंगकर्मी आन्दोलन के भी जागरूक द्रष्टा और महत्वपूर्ण रंगमंचीय आन्दोलनों के संयोजक भी माने जाते रहे हैं। उन्होंने संगीत के क्षेत्र में भी उसके व्यापक और विविध पक्षों को समेटते हुए कई पुस्तकें लिखी हैं जो हिन्दी के पाठकों को पहली बार सुलभ हो सकी हैं।

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