स्त्रियों की पराधीनता जॉन स्टुअर्ट मिल का प्रसिद्ध निबन्ध है जिसे स्त्री-मुक्ति-विमर्श के इतिहास में मेरी वोल्सटनक्राफ़्ट की पुस्तक स्त्री-अधिकारों का औचित्य-साधन के बाद दूसरा महत्त्वपूर्ण दस्तावेज़ माना जाता है। मिल ने इस कृति में पुरुष वर्चस्व पर आधारित मान्यताओं, परम्पराओं और नैतिकताओं पर ही नहीं, क़ानूनों पर भी सवाल उठाए हैं। परिवार और विवाह-संस्था के स्त्रीविरोधी चरित्र को अनावृत किया है। मिल द्वारा उन्नीसवीं सदी के उत्तरार्द्ध में प्रस्तुत किये गए ये विचार आज भी कितने प्रासंगिक हैं, यह बतलाने की ज़रूरत नहीं है।

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