नारी सनातन काल से पुरुष की लालसा का केन्द्र है। जीवन के संघर्षों में फँसकर अभागी नारी को संसार के प्रत्येक छल-कपट का सहारा लेना पड़ता है। किन्तु आधुनिक जीवन-संघर्षों की विषमता में ममता का सम्बल जीवन-नौका के लिए महान आशा है।
भगवती बाबू का यह उपन्यास आकार में छोटा होकर भी अपनी प्रभावशीलता में व्यापक है, जिसकी गूँज देर तक अपने भीतर और बाहर महसूस की जा सकती है।

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