सुधा उपाध्याय पत्रकारिता एवं जनसंचार के क्षेत्र की प्रतिष्ठित शिक्षाविद्, लेखक, शोधकर्ता और संवेदनशील चिन्तक हैं। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक, स्नातकोत्तर (स्वर्ण पदक) किया है। एम.फिल. और पी-एच.डी. की उपाधि भी वहीं से प्राप्त की है। वे कविता, आलोचना, कहानी लेखन और शिक्षण—चारों क्षेत्रों में सक्रिय रही हैं।
उनकी प्रमुख पुस्तकें हैं—‘इसलिए कहूँगी मैं’, ‘बोलती चुप्पी’ (कविता-संग्रह); ‘पाठ-पुनर्पाठ’, ‘औपन्यासिक चरित्रों में वर्चस्व की राजनीति : छठवें दशक के बाद’ (आलोचना); महत्त्वपूर्ण कविता संकलनों—‘स्त्री होकर सवाल करती हो’, ‘यथास्थिति से टकराते हुए दलित स्त्री’, ‘हिन्दी की चर्चित कवयित्रियाँ’ में उनकी कविताएँ संकलित हैं। केरल SCERT पाठ्यक्रम में हिन्दी की नौवीं कक्षा में कविता ‘बोनजाई’ शामिल। ‘शीतलवाणी’ त्रैमासिक पत्रिका में उदय प्रकाश साहित्यिक सृजन विशेषांक का सह-सम्पादन; समसामयिक साहित्यिक पत्रिकाओं में कविता, कहानी, लेख और समीक्षाएँ प्रकाशित। मीडिया से सम्बन्धित लेख महत्त्वपूर्ण पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित।
तमाम साहित्यिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका, साहित्यिक गोष्ठियों में दूरदर्शन के कार्यक्रमों में भागीदारी, आकाशवाणी द्वारा प्रसारित महिलाओं के कार्यक्रम ‘आधा आकाश’ में कविता पाठ और कई महत्त्वपूर्ण विषयों पर चर्चा में भागीदार, दैनिक अखबार ‘प्रभात ख़बर’ में कॉलम ‘अवसर’ के तहत निरन्तर लेखन, दिल्ली विश्वविद्यालय में महिला विकास केन्द्र के लिए सक्रिय भूमिका।
उन्हें ‘सरस्वती श्री सम्मान’ (2025), एशियन एकेडमी ऑफ़ फ़िल्म एंड टेलीविज़न (AAFT) द्वारा सरोजिनी नायडू सम्मान (2023), ‘शीला सिद्धान्तकर सम्मान’ (2019), ‘अमर सरस्वती सम्मान’ (2016), ‘मातृश्री रत्न’ (2016), ‘साहित्य गौरव सम्मान’ (2016), दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा ‘सावित्री सिन्हा स्वर्ण पदक पुरस्कार’ (1996) और ‘मैथिलीशरण गुप्त पुरस्कार’ (1996) से सम्मानित किया गया है।
सम्प्रति : प्रोफ़ेसर, हिन्दी विभाग, जानकी देवी मेमोरियल कॉलेज (दिल्ली विश्वविद्यालय)
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