उषा किरण ने चित्रकला एवं संस्कृत में एम.ए. किया। पी-एच.डी. की उपाधि प्राप्त की। ललित-कला विभाग, मेरठ कॉलेज, मेरठ में अध्यक्ष रहीं। लगभग चालीस वर्षों तक अध्यापन किया। अनेक शोधार्थियों ने उनके निर्देशन में पी-एच.डी. की उपाधि प्राप्त की। तूलिका एवं लेखनी पर समान अधिकार। अनेक शहरों में आयोजित चित्र-प्रदर्शनियों में उनकी कृतियों को सराहा गया है।
उनकी प्रमुख कृतियाँ हैं—‘ताना-बाना’ (कविता व रेखांकन संग्रह); ‘दर्द का चन्दन’ (उपन्यास); ‘लाल-पीली लड़की’ (कहानी-संग्रह)। साझा-संग्रहों के रूप में बीस पुस्तकें प्रकाशित। इसके अतिरिक्त अनेक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय व अन्तर्राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं में कहानी, लघुकथा, कविता, संस्मरण, समीक्षा एवं आलेख प्रकाशित। उनकी अपनी पुस्तकों व अन्य कई साहित्यिक पत्रिकाओं के आवरण-पृष्ठ पर उनकी पेंटिंग प्रकाशित हुई हैं।
बहुआयामी व्यक्तित्व की धनी उषा किरण की साहित्य, संगीत, कला और अध्यात्म में गहन अभिरुचि है। इन क्षेत्रों में योगदान हेतु संस्कार-भारती, अवन्तिका, अग्निपथ, वामा अखिल भारतीय महिला साहित्य समागम, इन्दौर, मध्यप्रदेश; उत्कर्ष ललित कला अकादमी, उत्तर प्रदेश; एस्थेटिक्स इंटरनेशनल, ऑल इंडिया कॉन्फ़्रेंस ऑफ इंटेलेक्चुअल्स एवं सिंगापुर संगम और भारतीय उच्चायोग सहित अनेक लब्ध प्रतिष्ठित संस्थाओं से सम्मानित व पुरस्कृत हुई हैं।
अमेरिका, इंग्लैंड, फ़्रांस, इटली, बेल्जियम, सिंगापुर, नीदरलैंड, कम्बोडिया, थाइलैंड, फ़िलीपींस, स्विट्ज़रलैंड, श्रीलंका, यू.ए.ई., ऑस्ट्रेलिया, हंगरी, ऑस्ट्रिया, चेक रिपब्लिक, जापान, इंडोनेशिया, मलेशिया एवं टर्की आदि देशों में स्थित विश्व प्रसिद्ध संग्रहालयों एवं चित्र-वीथिकाओं में युग-प्रवर्तक कलाकारों के चित्रों और मूर्ति-शिल्पों के अवलोकन एवं विभिन्न संस्कृतियों का अध्ययन करने का उन्हें सुअवसर प्राप्त हुआ है।
ब्लॉग : (ताना-बाना) https://ushascreation.blogspot.com/
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