राकेश कबीर एक प्रतिबद्ध व्यक्ति और रचनाकार हैं। सरल शब्दों और छोटी कविताओं के माध्यम से महत्वपूर्ण भावों को अभिव्यक्त करने में वे सक्षम हैं। उनकी कविताओं में नदियों, पहाड़ों, गांवों को देखने की एक नवीन दृष्टि है। दुनिया भर में हो रहे युद्धों, पलायन करने को मजबूर समुदायों की पीड़ा के साथ ही शोषकों को पहचान कर उनका प्रतिकार करने का साहस भी राकेश की कविता में है। उनके शब्दों में प्रतिकूल परिस्थितियों के विरूद्ध अड़कर खड़ा होने का भाव प्रबल है।
—शिवमूर्ति कथाकार
राकेश कबीर की कविताएँ अपने समय की जटिलताओं से टकराती हैं। नदियां और उनकी पीड़ा उनकी कविता के केंद्र में है। उनकी कविताओं में सघन आत्मविश्वास है जो उन्हें ‘हम न मरब मरीहैं संसारा’ वाले कबीर के पास ले जाकर खड़ा करता है। राकेश मानवता और पर्यावरण के पक्ष में हर तरह के युद्ध और विभाजन की प्रवृत्ति के खिलाफ है। यही उनकी कविता की ताकत है।
—दिनेश कुशवाह कवि


