राकेश कबीर युवा कवि हैं। उनकी कविताओं में अपार सम्भावनाएँ दिखाई देती हैं। ‘नदियाँ बहती रहेंगी’ कविता-संग्रह अपने समय की कविता है, जो वर्तमान के कठिन दौर में भी साहस के साथ प्रस्तुत हुई है। मैं राकेश की हिम्मत और ‘नदियाँ बहती रहेंगी’ संग्रह को दाद देता हूँ।
—नरेश सक्सेना वरिष्ठ कवि
राकेश कबीर जनपक्षधरता के कवि हैं। उनकी कविताओं में लड़ने की जो जिजीविषा है वह काबिले तारीफ है। यह कविता-संग्रह ‘नदियाँ बहती रहेंगी’, मार्क्स, आंबेडकर और फुले का एक ट्रायल निर्मित करता है जो अद्भुत है। यह संकलन समाज को एक नया आयाम देता है।
—मूलचन्द सोनकर आलोचक व दलित चिन्तक
जंगलों, नदियों और पहाड़ों की अपनी भाषा होती है, अपने दर्द होते हैं। राकेश कबीर की कविताएँ उन जंगलों, नदियों और पहाड़ों की आवाज हैं। विकास के नाम पर जो परियोजनाएँ बनाई जा रही हैं, उनसे हजारों की संख्या में लोग विस्थापित हो रहे हैं। जो विकास है उसके पीछे बहुत बड़ी साजिश छिपी हुई है। लोकजीवन में यह विकास और पूँजीवाद लगातार संकट पैदा कर रहा है। इस संकट को राकेश कबीर की कविताओं में भाँपा जा सकता है।
—स्वप्निल श्रीवास्तव कवि व कथाकार


