मन्नू भण्डारी हिन्दी के उन लेखकों में हैं जिनकी कृतियों को अपार लोकप्रियता के साथ आलोचना की भरपूर सराहना मिली। ‘आपका बंटी’ पुस्तकाकार आने से पहले ‘धर्मयुग’ में धारावाहिक प्रकाशित हुआ था और यहीं से इसने पाठकों को अपने साथ बाँध लिया। छह दशकों से हिन्दी की सबसे अधिक पढ़ी जाने वाली कृतियों में ‘आपका बंटी’ शामिल है, यह कई विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम का हिस्सा भी है।
एक उपन्यास के रूप में ‘आपका बंटी’ ने बताया कि आधुनिक जीवन की विडम्बनाओं के कैसे-कैसे रूप हो सकते हैं, साथ ही इन तनावों और द्वन्द्वों को कोई लेखक आत्मीय भाषा और सहज शिल्प में इस तरह प्रस्तुत कर सकता है कि पाठक उसके चरित्रों से तादात्म्य स्थापित कर लें। मन्नू भण्डारी के लेखन की उपलब्धि अब हिन्दी की उपलब्धि भी है।
राधाकृष्ण मूल्यांकन माला की गौरवशाली परम्परा में ‘आपका बंटी’ पर यह आलोचना कृति हिन्दी के आधिकारिक विद्वानों और नई पीढ़ी के लेखकों के चिन्तन-मनन का सार्थक परिणाम है। हिन्दी साहित्य के विद्यार्थियों-शोधार्थियों के लिए इस मूल्यांकन माला के पुनर्नवा प्रारूप में अब कृतिकारों के साथ कृतियों पर भी मूल्यांकनपरक पुस्तकें उपलब्ध हैं।
मन्नू जी की अविस्मरणीय कृति को विभिन्न दृष्टियों से देखने-समझने का यह प्रयास हिन्दी आलोचना के लिए भी विश्वसनीय होगा।

