रौशन तक्री
रौशन तक्री का जन्म 1958 में लखनऊ, उत्तर प्रदेश में हुआ। उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से 'लखनऊ की ऐतिहासिक इमारतों का संरक्षण' विषय पर पी-एच.डी. की। पेशे से सिविल इंजीनियर हैं। उनकी प्रमुख पुस्तकें हैं- 'बेगम हजरत महल', 'लखनऊ का शिया समाज', 'लखनऊ का पहला क्रान्तिवीर', '1857 के बाद लखनऊ की बरबादी', 'लखनऊ की भांड परम्परा', 'लखनऊ : अपने आईने में', 'फ़न-ए-मौसीक्री' (हिन्दी); 'अवध दस्तावेज', 'लखनऊ 1857', 'द टू ग्रेट वार्स', 'इमेजेस ऑफ़ लखनऊ', 'बेगम हजरत महल', 'कन्तर्वेशन ऑफ़ लखनऊ हेरिटेज', 'लखनऊ मॉन्युमेंट्स: कन्जर्वेशन प्रॉब्लम ट्रैंड सॉल्यूशंस', 'द टर्बुलेंट हिस्ट्री' (अंग्रेजी); 'दादा जान ने कहा थी', 'बेजबान बीवी', 'अजायब नगर', 'दो जल्लाद', 'दो गज्ज जमीन', 'यह हो रहा है' (नाटक, उर्दू)।
सम्प्रति अवध में सांस्कृतिक विरासत संरक्षण हेतु स्थापित गैर-सरकारी संस्था 'हारका' (HARCA) के संस्थापक सचिव हैं।
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